क्या भारत का किसी देश के साथ रक्षा समझौता है? जानिए युद्ध में कौन देगा भारत का साथ

क्या भारत का किसी देश के साथ NATO जैसी रक्षा संधि है? जानिए युद्ध की स्थिति में कौन देगा भारत का साथ, जानिए भारत की रक्षा संधि।

पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौते के बीच बड़ा सवाल: क्या भारत का भी किसी देश के साथ NATO जैसा समझौता है?

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में पाकिस्तान अपनी रणनीतिक और रक्षा साझेदारियों का दायरा लगातार बढ़ा रहा है। सऊदी अरब के साथ सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के बाद अब कुवैत के साथ भी इसी प्रकार के रक्षा समझौते की चर्चा तेज है। ऐसे में भारत (भारत की रक्षा संधि) में भी यह सवाल उठ रहा है कि यदि भविष्य में भारत पर कोई बड़ा सैन्य हमला होता है, तो क्या कोई देश कानूनी रूप से भारत के साथ युद्ध लड़ने के लिए बाध्य होगा?  इस सवाल का उत्तर भारत की विदेश और रक्षा नीति से जुड़ा है।

क्या भारत के पास NATO जैसी रक्षा संधि है?

सीधा जवाब है—नहीं। भारत का दुनिया के किसी भी देश के साथ ऐसा कोई रक्षा समझौता नहीं है, जिसमें यह प्रावधान हो कि भारत पर हमला होने की स्थिति में दूसरा देश स्वतः सैन्य कार्रवाई करेगा। इसी प्रकार भारत भी किसी अन्य देश के युद्ध में स्वतः शामिल होने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं है। यही नीति भारत की रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) का महत्वपूर्ण आधार मानी जाती है।

भारत ने सैन्य गठबंधनों से दूरी क्यों बनाए रखी?

स्वतंत्रता के बाद भारत ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement) की नीति अपनाई। इसका उद्देश्य था कि भारत किसी भी सैन्य गुट का हिस्सा बने बिना अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर विदेश नीति तय करेगा।

आज वैश्विक परिस्थितियां बदल चुकी हैं, लेकिन भारत अब भी अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता को प्राथमिकता देता है। भारत विभिन्न देशों के साथ मजबूत संबंध रखता है, लेकिन किसी ऐसे सैन्य गठबंधन में शामिल नहीं है जो उसे दूसरे देशों के युद्ध में स्वतः शामिल होने के लिए बाध्य करे।

रूस भारत का सबसे बड़ा रक्षा साझेदार, लेकिन सैन्य सहयोगी नहीं

भारत और रूस के बीच लंबे समय से मजबूत रक्षा संबंध रहे हैं। भारतीय सेना के कई प्रमुख हथियार, लड़ाकू विमान, टैंक, पनडुब्बियां, एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम और ब्रह्मोस मिसाइल जैसे महत्वपूर्ण रक्षा उपकरण दोनों देशों के सहयोग का परिणाम हैं।

हालांकि, इन मजबूत संबंधों के बावजूद दोनों देशों के बीच ऐसा कोई कानूनी समझौता नहीं है, जिसके तहत युद्ध की स्थिति में रूस भारत की ओर से सैन्य कार्रवाई करने के लिए बाध्य हो।

दोनों देश रक्षा तकनीक, हथियार निर्माण और संयुक्त सैन्य अभ्यास में सहयोग करते हैं, लेकिन सामूहिक रक्षा संधि का हिस्सा नहीं हैं।

1971 की भारत-सोवियत संधि क्या थी?

अक्सर 1971 की भारत-सोवियत मैत्री संधि का उल्लेख किया जाता है, लेकिन यह भी NATO जैसी सामूहिक रक्षा संधि नहीं थी।

उस समझौते में यह प्रावधान था कि यदि किसी पक्ष की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न होता है तो दोनों देश आपसी परामर्श करेंगे और परिस्थिति के अनुसार निर्णय लेंगे। इसमें स्वतः सैन्य हस्तक्षेप की कोई बाध्यता नहीं थी।

पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौता क्यों चर्चा में है?

पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए रक्षा सहयोग को सामूहिक सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। इस व्यवस्था के तहत दोनों देश सुरक्षा संबंधी मामलों में एक-दूसरे के साथ समन्वय बढ़ाने पर सहमत हैं।

पाकिस्तान लंबे समय से सऊदी अरब में सैन्य प्रशिक्षक, सुरक्षा सलाहकार और सैनिक तैनात करता रहा है, जबकि सऊदी अरब आर्थिक सहयोग, निवेश और ऊर्जा क्षेत्र में पाकिस्तान का महत्वपूर्ण साझेदार है।

यदि भविष्य में कुवैत या अन्य पश्चिम एशियाई देश भी इस तरह के सुरक्षा सहयोग का हिस्सा बनते हैं, तो क्षेत्रीय रक्षा नेटवर्क और मजबूत हो सकता है।

युद्ध की स्थिति में भारत को किस तरह का समर्थन मिल सकता है?

यदि भविष्य में भारत को किसी बड़े सैन्य संघर्ष का सामना करना पड़ता है, तो कोई भी देश कानूनी रूप से भारत की ओर से युद्ध लड़ने के लिए बाध्य नहीं होगा।

हालांकि, परिस्थितियों के अनुसार भारत को कई मित्र देशों से विभिन्न प्रकार का सहयोग मिल सकता है, जैसे—

  • रक्षा उपकरण और हथियारों की आपूर्ति
  • खुफिया जानकारी (Intelligence Sharing)
  • निगरानी एवं तकनीकी सहायता
  • लॉजिस्टिक सपोर्ट
  • कूटनीतिक समर्थन

रूस, अमेरिका, फ्रांस और इजरायल जैसे देशों से सहयोग मिलने की संभावना परिस्थितियों और उस समय की अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक स्थिति पर निर्भर करेगी।

क्या Quad NATO जैसा सैन्य गठबंधन है?

भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया Quad (Quadrilateral Security Dialogue) के सदस्य हैं, लेकिन इसे NATO जैसा सैन्य गठबंधन मानना सही नहीं होगा।

Quad का उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, नई तकनीकों, आपूर्ति श्रृंखला और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करना है।

इस समूह में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि किसी एक सदस्य पर हमला होने पर बाकी सदस्य स्वतः युद्ध में शामिल हो जाएंगे।

निष्कर्ष

भारत की सुरक्षा नीति किसी सैन्य गठबंधन पर नहीं बल्कि रणनीतिक स्वायत्तता, मजबूत रक्षा क्षमता और बहुपक्षीय कूटनीति पर आधारित है। भारत विभिन्न देशों के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाता है, लेकिन किसी ऐसे समझौते का हिस्सा नहीं है जो युद्ध की स्थिति में स्वतः सैन्य हस्तक्षेप सुनिश्चित करता हो।

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