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आलेख
सिर्फ धुआँ नहीं, मौसम भी बढ़ा रहा शहरों की हवा में ज़हर: रिपोर्ट
भारत के बड़े शहरों में बढ़ते प्रदूषण को अक्सर सिर्फ उत्सर्जन का नतीजा माना जाता है। गाड़ियों का धुआँ, उद्योगों का धुआँ, कूड़ा जलाना। मगर एक नई स्टडी बताती है कि कहानी इससे कहीं ज़्यादा जटिल है।
दरअसल कई शहरों में हवा की गुणवत्ता सिर्फ इस…
आलेख: धरती का बढ़ रहा बुखार, इलाज अब भी अधूरा
आलेख: 2025 दुनिया के लिए एक और चेतावनी भरा साल बनकर उभरा है। गर्मी, सूखा, बाढ़, तूफान और जंगलों की आग ने यह साफ कर दिया है कि जलवायु संकट अब भविष्य की बात नहीं रहा। यह हमारे दरवाज़े पर खड़ा है। और सबसे ज्यादा चोट उन लोगों पर पड़ी है, जो…
एनर्जी सेक्टर में अब सबक़ एक है: भरोसा, विविधता और साझेदारी
आलेख। दुनिया आज शायद अपने सबसे उलझे हुए दौर में है. तेल और गैस के पुराने खतरे तो हैं ही, अब लिथियम, निकल, कोबाल्ट जैसे नए नाम भी उसी लिस्ट में शामिल हो गए हैं. कहीं खदानों में खनिज की कमी है, तो कहीं देशों के बीच भरोसे की. इसी बीच,…
क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स 2026: भारत फिर दुनिया के सबसे प्रभावित देशों की सूची में
आलेख। COP30 में पेश की गई जर्मनवॉच की नई रिपोर्ट क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स 2026 ने एक बार फिर याद दिलाया है कि जलवायु संकट अब भविष्य की नहीं, वर्तमान की कहानी है। रिपोर्ट के मुताबिक, 1995 से 2024 के बीच दुनिया भर में 9,700 से ज़्यादा चरम मौसम…
फैशन का काला सच: कोयले से बनते कपड़े, मज़दूरों की मजबूरी
आलेख: सोचिए! एक छोटा सा कमरा है। खिड़की बंद है, बाहर सूरज तप रहा है और अंदर भट्ठी जैसी गर्मी है। पसीने से तरबतर मज़दूर रंगाई की मशीन के पास खड़ा है। धुएं की गंध उसकी साँसों में घुल चुकी है। यही है वो हकीकत, जिसे फैशन इंडस्ट्री बड़ी चतुराई…
पेरिस समझौते से और दूर ले जा रही है दुनिया की फॉसिल फ्यूल योजनाएँ: नई रिपोर्ट
स्टॉकहोम से जारी हुई एक बड़ी रिपोर्ट ने साफ कहा है कि पेरिस समझौते के 10 साल बाद भी सरकारें अब भी पुराने रास्ते पर चल रही हैं। 2025 का प्रोडक्शन गैप रिपोर्ट बताती है कि 2030 तक दुनिया भर की सरकारें जितना कोयला, तेल और गैस निकालने की योजना…
सिर्फ पेड़ लगाना नहीं, समझदारी से लगाना ज़रूरी है
आलेख: पेड़ लगाना जलवायु परिवर्तन से लड़ाई का आसान हल माना जाता है। लेकिन Science जर्नल में छपी एक नई स्टडी कहती है कि हकीकत उतनी सीधी नहीं है। रिसर्च के मुताबिक दुनिया भर में अगर पेड़ लगाने और जंगल बहाल करने के काम सही जगह पर और टिकाऊ तरीके…
गंगोत्री की जलकथा बदल रही है: बर्फ़ घट रही, बारिश बढ़ रही
आलेख: उत्तराखंड की ऊँचाइयों में बसी गंगोत्री घाटी, जहाँ से गंगा की धारा जन्म लेती है, देश के करोड़ों लोगों की आस्था और ज़िंदगी का आधार है। सदियों से यहाँ की बर्फ़ और ग्लेशियर का पिघलता पानी मैदानों तक पहुँचकर खेतों को सींचता रहा, बिजलीघरों…
संस्कृत दिवस की महत्ता व उपयोगिता; वैदिककाल से लेकर वर्तमान संदर्भ में
डॉ राम भूषण बिजल्वाण
“भारतस्य प्रतिष्ठे द्वे संस्कृतं संस्कृतिस्तथा”
भारतीय ज्ञान परंपरा को संस्कृत भाषा और उसका बृहद् इतिहास ही परिपुष्ट करता है। भारत जाना ही जाता है अपनी संस्कृति और संस्कृत के लिए। संस्कृत सिर्फ़ देवभाषा या…
उत्तराखंड की आपदा: जब हिमालय ने चुप्पी तोड़ी, और हमारे तैयार न होने की कीमत चुकाई गई
दोपहर का वक्त था। बादल घिरे थे, पर कोई डर नहीं था। यह तो पहाड़ों का रोज़ का मिज़ाज है। लेकिन अचानक, जैसे किसी ने आसमान के दरवाज़े को खोल दिया हो।
एक गगनचुंबी जलधारा सीधी पहाड़ से उतरती हुई धाराली की गलियों में घुस गई। जो सामने आया, उसे…