UCC

जहां किताबों से मिला बचपन, मेले में स्कूली छात्रों की ऐतिहासिक मौजूदगी

देहरादून। डिजिटल युग (digital age) के इस दौर में, जब बच्चों का अधिकतर समय मोबाइल और स्क्रीन पर सिमटता जा रहा है, ऐसे में विश्व पुस्तक मेले में स्कूली छात्रों की अभूतपूर्व भागीदारी एक आशाजनक और प्रेरक संकेत बनकर सामने आई है। दिल्ली–एनसीआर में कड़ाके की शीतलहर के बावजूद बच्चों का उत्साह कम नहीं हुआ और शुक्रवार को मेले में उमड़ी स्कूली छात्रों की भीड़ ने यह साबित कर दिया कि किताबों के प्रति आकर्षण आज भी जीवित है।

स्कूली बच्चों को फिक्शन, नॉन-फिक्शन, कॉमिक्स, ग्राफिक नॉवेल्स (जैसे Dogman, Geronimo), वीडियो गेम-आधारित किताबें (Minecraft, Roblox) और अन्य शैलियों की किताबें के साथ देखा गया। दो दिन पहले ही कई बच्चों को इस मेला में अंतरिक्ष यात्रियों (जैसे ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला) और अन्य प्रेरणादायक हस्तियों के साथ संवाद, कहानी सुनाने के सत्र और रचनात्मक कार्यशालाओं में देखा गया।

 भारत के प्रथम अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने सैकड़ों स्कूली छात्रों और उनके परिजनों से सीधे संवाद करते हुए सादगी, ईमानदारी और सहज हास्य के साथ अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा, “मैं अंतरिक्ष में अकेला नहीं गया था, मेरे साथ देश के एक अरब लोगों की दुआएं थीं।” ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने बच्चों को प्रेरित करते हुए भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में कोई भी छात्र भारत के अंतरिक्ष अभियानों का नेतृत्व कर सकता है।

विश्व पुस्तक मेले के आयोजक राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी) की इस पहल की सराहना की जानी चाहिए कि उसने बच्चों तक पुस्तकों को पहुंचाने और उनमें पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। विभिन्न स्कूलों से आए छात्रों ने न केवल पुस्तकों की खरीदारी की, बल्कि लेखकों से संवाद, बाल साहित्य सत्रों और रचनात्मक गतिविधियों में भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।

मेले में बच्चों के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए स्टॉल, चित्र पुस्तकों, ज्ञानवर्धक किताबों और कहानियों की दुनिया ने उनके बचपन को मानो किताबों से जोड़ दिया। शिक्षकों और अभिभावकों का भी मानना है कि इस तरह के आयोजनों से बच्चों में कल्पनाशीलता, सोचने की क्षमता और भाषा कौशल का विकास होता है। स्कूली बच्चों के साथ ही कई अन्य किशोरों से भी बात हुई।

सभी से बातचीत का लब्बोलुआब यही है कि इनके हाथों में अंग्रेजी उपन्यास , शॉर्ट स्टोरी कलेक्शन और बायोग्राफी इस बात का स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि भाषा सीखने का तरीका अब तेजी से बदल रहा है। क्लासरूम की सीमाओं और ग्रामर पुस्तकों से आगे बढ़कर युवा पीढ़ी अब साहित्य को अपना मार्गदर्शक बना रही है।

इनका मानना है कि अंग्रेजी उपन्यास केवल शब्दावली ही नहीं सिखाते, बल्कि सोचने का दृष्टिकोण, संवाद की शैली और आत्मविश्वास भी विकसित करते हैं। किशोरों का कहना है कि उपन्यास पढ़ते समय वे भाषा को रटते नहीं, बल्कि उसे महसूस करते और जीते हैं। यही वजह है कि क्लासिक रचनाओं से लेकर समकालीन अंग्रेजी साहित्य तक, हर तरह की पुस्तकों पर इन किशोरवय युवा पाठकों की खास नजर बनी हुई है।

विश्व पुस्तक मेला केवल पुस्तकों का बाज़ार नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति और विचारों का संगम है। स्कूली छात्रों की यह ऐतिहासिक मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि यदि सही मंच और वातावरण मिले, तो नई पीढ़ी को किताबों से जोड़ना आज भी संभव है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

Khatron Ke Khiladi Season 14 : जानिए कौन हैं इस बार के Contestant? Benefits of Mushrooms : जानिए मशरूम सेहत के लिए कितने फायदेमंद.. Happy Birthday Salman Khan: जानिए! भाई जान से जुड़े कुछ ख़ास Facts…