राज्य स्तरीय संकट प्रबन्धन सैल की बैठक सम्पन्न, मुख्य सचिव ने वनाग्नि प्रबन्धन के दिए निर्देश

देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय संकट प्रबन्धन सैल (Crisis Management Cell) की बैठक आहुत की गयी। इस दौरान वह नागनी प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए।

बैठक में मुख्य वन संरक्षक, वनाग्नि एवं आपदा प्रबन्धन सुशांत कुमार पटनायक ने प्रदेश में वनाग्नि प्रबन्धन में की जा रही कार्यवाही का संक्षिप्त प्रस्तुतीकरण किया। प्रस्तुतीकरण में प्रदेश के अन्तर्गत अब तक घटित वनाग्नि घटनाओं, एफएसआई द्वारा प्राप्त अलर्ट, मानव संसाधन व उपकरण, कन्ट्रोल बर्निंग/फायर लाईन मैनेटनेन्स, चीड़ पिरूल एकत्रीकरण, सामुदायिक सहभागिता, शीतलाखेत मॉडल, अंतर्विभागीय समन्वय बैठक, फॉरेस्ट फायर मॉक ड्रिल आदि की जानकारी प्रदान की गयी।

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इस वर्ष वनाग्नि की घटनाओं के नियंत्रण हेतु फिल्ड स्तर पर व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया गया है। Chir Pirul (pine needles) के एकत्रीकरण पर विशेष जोर दिया गया है, जिससे वनाग्नि घटनाओं को कम करने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के रोजगार सृजन पर भी जोर दिये जाने का प्रयास किया जा रहा है।

इसके साथ ही community participation को बढ़ावा देते हुए स्थानीय लोगों को इस अभियान में सक्रिय रूप से जोड़ा जा रहा है। राज्य में real-time monitoring के लिए Integrated Command and Control Centre को और सशक्त किया गया है तथा Uttarakhand Forest Fire Mobile App के माध्यम से त्वरित सूचना एवं प्रतिक्रिया की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि वनाग्नि, मानव-वन्यजीव संघर्ष, अवैध पेड़ कटान एवं वन विभाग से संबंधित किसी भी शिकायत के लिए Integrated Helpline Number 1926 को पूरी तरह सक्रिय किया गया है, जिससे आम नागरिक सीधे प्रशासन से जुड़ सकें।

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इसके उपरान्त समस्त जिलाधिकारियों द्वारा वनाग्नि को लेकर जिलें में की जा रही तैयारियों के संबंध में अवगत कराया गया। बैठक में मुख्य सचिव द्वारा वनाग्नि नियंत्रण हेतु निम्न निर्देश दिये गये :-

1. प्रदेश में अधिक से अधिक चीड़ पिरूल का उपयोग करने हेतु पैलेट्स / ब्रिकेट्स यूनिट
स्थापित किये जाये।
2. प्रभाग स्तर पर एकत्रित चीड़ पिरूल की उपयोगिता का आंकलन भी किया जाये।
3. सिविल / नाप भूमि में वनाग्नि घटनाएं घटित होने पर वन विभाग के साथ-साथ रेखीय विभागों
द्वारा भी वनाग्नि नियंत्रण में आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाये।
4. वन विभाग के समस्त अधिकारियों / कर्मचारियों द्वारा आपदा एवं प्रबन्धन द्वारा विकसित सचेत ऐप का भी उपयोग किया जाये।

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