17 सितंबर (मंगलवार) से शुरू होगा पितृपक्ष, 2 अक्टूबर को होगा समापन

  • सोशल मीडिया पर भारी संख्या में लोगों की जिज्ञासा व्यक्त करने पर पितृपक्ष 2024 पर उत्तराखंड ज्योतिष रत्न का महत्वपूर्ण बयान जारी

आचार्य चंडी प्रसाद घिल्डियालदेहरादून/श्रषिकेश। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को पितरों को प्रसन्न और संतुष्ट करने वाला पर्व माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार  पितृ पक्ष की शुरुआत भाद्रपद पूर्णिमा तिथि से होती है। परंतु लोगों की जिज्ञासा रहती है कि हमारे पितरों का श्राद्ध किस दिन होगा। सोशल मीडिया पर लोगों की जिज्ञासाओं का संज्ञान लेते हुए उत्तराखंड ज्योतिष रत्न आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल “दैवज्ञ” का इस संदर्भ में महत्वपूर्ण बयान जारी हुआ है।

आचार्य दैवज्ञ ने कहा है, कि पहली तिथि अर्थात पूर्णिमा के दिन  उन पूर्वजों के सम्मान में श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु किसी भी महीने की पूर्णिमा के दिन हुई थी।  यह वह समय होता है ,जब पूर्वजों की आत्माएं प्रसाद और प्रार्थनाओं के प्रति सबसे अधिक ग्रहणशील होती हैं। श्राद्ध पक्ष वास्तव में पितरों को याद करके उनके प्रति श्रद्धा भाव प्रदर्शित करने का अवसर है। पितरों का श्राद्ध करने से जन्म कुंडली में व्याप्त पितृदोष से भी हमेशा के लिए छुटकारा मिलता है।

ज्योतिष शास्त्र के मर्मज्ञ एवं शिक्षा/ संस्कृत शिक्षा के डिप्टी डायरेक्टर आचार्य “दैवज्ञ” विश्लेषण करते हुए बताते हैं, कि भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 17 सितंबर को प्रातः 11:44 से शुरू हो रही है ,और इसका समापन 18 सितंबर को  प्रातः 08:04 पर हो रहा है। ऐसे में भाद्रपद पूर्णिमा व्रत 17 सितंबर को होगा और उदयातिथि के आधार पर भाद्रपद पूर्णिमा का स्नान और दान 18 सितंबर को होगा परंतुश्राद्ध दिन में 11 बजे के बाद करना ही शुभ होता है, ऐसे में 17 सितंबर को पूर्णिमा तिथि में पहला श्राद्ध हो पाएगा क्योंकि 18 सितंबर को सुबह 08:04 बजे पूर्णिमा तिथि खत्म हो जा रही है।  इस प्रकार पितृ पक्ष का प्रारंभ 17 सितंबर दिन मंगलवार से ही शास्त्र सम्मत है, इसमें किसी को भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है।

पितृ पक्ष का महत्व

पितृ पक्ष हिंदुओं के लिए अपने पूर्वजों को सम्मान देने और परिवार की भलाई और समृद्धि के लिए उनका आशीर्वाद लेने का समय है। ऐसा माना जाता है कि इस अवधि के दौरान अनुष्ठान करने और प्रसाद चढ़ाने से पूर्वजों की आत्माओं को शांति और मुक्ति मिलती है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि वे अपने वंशजों को खुशी और सफलता का आशीर्वाद देते हैं।

पितृ पक्ष 2024 तिथियां

श्रीमद् भागवत व्यास गद्दी पर बैठने वाले आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल स्पष्ट करते हैं, कि वर्ष 2024 में पितृ पक्ष 17 सितंबर से शुरू होकर 2 अक्टूबर को समाप्त होगा।  इस साल पितृ पक्ष में श्राद्ध की तिथियां निम्न प्रकार से रहेगी।

17 सितंबर, मंगलवार: पूर्णिमा श्राद्ध

18 सितंबर, बुधवार: प्रतिपदा श्राद्ध

19 सितंबर, गुरुवार: द्वितीया श्राद्ध

20 सितंबर, शुक्रवार: तृतीया श्राद्ध

21 सितंबर, शनिवार: चतुर्थी श्राद्ध, महाभरणी

22 सितंबर, रविवार: पंचमी श्राद्ध

23 सितंबर, सोमवार: षष्ठी श्राद्ध, सप्तमी श्राद्ध।

24 सितंबर, मंगलवार: अष्टमी श्राद्ध

25 सितंबर, बुधवार: नवमी श्राद्ध, मातृ नवमी।

26 सितंबर, गुरुवार: दशमी श्राद्ध

27 सितंबर, शुक्रवार: एकादशी श्राद्ध

29 सितंबर, रविवार: द्वादशी श्राद्ध,

30 सितंबर, सोमवार: त्रयोदशी श्राद्ध

1 अक्टूबर, मंगलवार: चतुर्दशी श्राद्ध

2 अक्टूबर, बुधवार: अमावस्या श्राद्ध, सर्व पितृ अमावस्या के साथ पितृपक्ष का विसर्जन हो जाएगा।

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आचार्य का संक्षिप्त परिचय

आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल” दैवज्ञ “

राज्य लोक सेवा आयोग से चयनित सहायक निदेशक शिक्षा – संस्कृत शिक्षा उत्तराखंड सरकार।

निवास स्थान 56 / 1 धरमपुर देहरादून।

फ़ोन : 9411153 845 एवं 701788 6131

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