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28 साल पहाड़, उतरे मैदान, पहुंचे ऋषिकेश डॉ त्रिलोक चंद्र सोनी

देहरादून: अट्ठाइस वर्षों की ग्रामीण पर्वतीय अंचलों के दुर्गम क्षेत्रों में सेवा करते हुए डॉ त्रिलोक चंद्र सोनी (Dr. Trilok Chandra Soni) का पारस्परिक स्थानांतरण पीएम श्री राजकीय इण्टर कालेज वीरभद्र ऋषिकेश होने पर उन्हें विद्यालय द्वारा भावभीनी विदाई दी गई। बताते चलें डॉ सोनी राइका मरोड़ा, सकलाना में दस वर्षो से प्रवक्ता भूगोल के पद पर कार्यरत थे। सकलाना क्षेत्र में डॉ सोनी ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अलख जला के रखी थी उनका यह योगदान स्वर्णिम अक्षरों में रहेगा और आनेवाली पीढ़ी के लिए एक प्रेरणास्रोत बना है।

ग्रामीण परिवेश में पले डॉ त्रिलोक चंद्र सोनी की शिक्षा देवाल के सरकारी स्कूलों से हुई हैं और 28 सालों का अहम जीवन का समय छात्रहित में डी दुर्गम, ई अति दुर्गम व एफ अति विशिष्ट दुर्गम पर्वतीय अंचलों के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के भविष्य संवारने में बिताया है। कौन कहता हैं ग्रामीण दूरस्थ क्षेत्र के विषम परिस्थितियों में लोग गुमनाम हो जाते है जिसका खासा उदाहरण डॉ सोनी हैं जिन्होंने अट्ठाइस साल दुर्गम में रहते हुए शिक्षक की भूमिका के साथ वृक्षमित्र के रूप में एक अलग पहचान बनाई है आज डॉ सोनी शिक्षक के रूप में काम और वृक्षमित्र व पर्यावरणविद् के रूप में उनकी एक अलग पहिचान समाज में बनी है।

वृक्षमित्र डॉ सोनी कहते हैं जब मेरी 1998 में राउमावि उर्गम में नियुक्ति हुई तो उस समय हेलेंग से 14 किमी की पैदल दूरी तय कर विद्यालय पहुंचा जाता था ऐसे जगह मेने सेवा की हैं में नारायण नगर सुनाई, मोलाधार लोस्तू, सुमाड़ी, मरोड़ा सकलाना में रहते हुए अट्ठाइस वर्षों के दौरान विभिन्न चुनियोतियों से गुजरते हुए विषम परिस्थितियों में मेने छात्रहित में कार्य किया तथा जनहित के मुद्दों पर जन जन को जागरूक किया। पौधे उपहार में भेंट करने, दूल्हा दुल्हन को शगुन में पौधा देने, अपने खास यादगार पलों पर पौधारोपण, जन्मदिन, शादी की सालगिरह, बच्चे के नामकरण, अन्नप्रासन तथा अपनो के नाम पर पौधा रोपण करने की शुरुवात इन ग्रामीण दूरस्थ क्षेत्रों से हुई है इन कार्यों ने समाज में मुझे नई पहचान दी है

ये अट्ठाइस सालों का दुर्गम क्षेत्र में बिताया हुआ समय मेरे लिए अस्मरणीय रहेगा। विदाई के पल पर कहते हुए प्रधानाचार्य बीआर शर्मा ने कहा मरोड़ा विद्यालय को डाक्टर सोनी ने एक अलग पहचान दी है उनके लगाए हुए पौधे स्कूल की शोभा बढ़ा रहे हैं वे अपने सामाजिक कार्यों के साथ हमेशा छात्रहित में समर्पित रहते थे उनका मृदुभाषी स्वभाव छात्रों व शिक्षकों में एक जोश भर देता था उनकी कमी विद्यालय ही नहीं क्षेत्र में रहेगी। साहिल जोशी जिनका कनिष्क लिपिक से प्रधान सहायक के पद पर पदोन्नति होने पर उनकी विदाई भी दी गई। कार्यक्रम में किरन सोनी, महावीर धनोला, अनिल हटवाल, अनूप थपलियाल, सुशील कांदली, इंद्रदेव वशिष्ठ, राहुल जोशी, राजेंद्र रावत, रामस्वरूप उनियाल, तेजी महर, पवित्रारानी, शशि ड्यूटी, इंदु नेगी, बबीता उनियाल, माधुरी भंडारी तथा कार्यक्रम का संचालन सुशील कांदली ने की।

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