छात्र कल्याण ही शिक्षक की प्राथमिकता: डॉ बिजल्वाण

श्री गुरू राम राय लक्ष्मण संस्कृत महाविद्यालय देहरादून में मनाया गया शिक्षक दिवस

  • एक सभ्य समाज की स्थापना में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण

  • छात्र को सर्वतोमुखी बनाना ही शिक्षक का मूल कर्तव्य: डॉ बिजल्वाण

श्री गुरु राम राय लक्ष्मण संस्कृत महाविद्यालयदेहरादून। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी ‘शिक्षक दिवस’ पर देहरादून महानगर में श्री गुरु राम राय लक्ष्मण संस्कृत महाविद्यालय की ओर से महाविद्यालय परिसर में डॉ राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि अर्पित की गई एवं उनके जन्मदिवस को शिक्षक दिवस के रूप में धूम धाम से मनाया गया।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राम भूषण बिजल्वाण ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने उद्बोधन में महान दार्शनिक एवं सुयोग्य शिक्षक तथा भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति डॉ राधाकृष्णन जी को नमन किया तथा छात्रों को नियमित अध्ययन हेतु तैत्तिरीय उपनिषद की शिक्षावल्ली का संदेश “मातृ देवो भव”, पितृ देवो भव, आचार्य देवो भव, स्वाध्यान्मा प्रमद:, आदि सूक्तियों से छात्रों को शिक्षक, माता-पिता तथा समाज के प्रति निष्ठावान होने के प्रति प्रेरित किया और शिक्षकों को छात्रों की सफलता की कुंजी बताते हुए उन्हें उत्कृष्ट मार्गदर्शन की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम का सफल संचालन शास्त्री द्वितीय वर्ष के छात्र सौरभ तिवारी ने किया और शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता प्रकट की। व्याकरण विभागाध्यक्ष डॉ शैलेन्द्र प्रसाद डंगवाल ने भी छात्रों को आशीर्वचन हेतु संस्कृत वांगमय से तमाम सूक्तियों तथा गुरु शिष्य परम्परा का महत्व बताया। छात्र से शिक्षक सीखता है अतः छात्रों को नियमित अध्ययन करने और शिक्षकों से प्रश्न करने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर उपस्थित हिंदी विभागाध्यक्षा डॉ सीमा विजल्वाण ने भी छात्रों को आशीर्वाद रूप में उज्ज्वल भविष्य की कामना की। आंग्ल भाषा के शिक्षक श्री दीपक बहुगुणा जी ने शिक्षक दिवस की पूर्व पीठिका बताते हुए डॉ राधाकृष्ण जी के शिक्षा जगत में योगदान को स्थापित किया। किस प्रकार उन्होंने देश विदेशों में शिक्षा के माध्यम से भारत का परचम लहराया तथा छात्रों को डॉ राधाकृष्णन के जीवन चरित से प्रेरणा लेने की सलाह दी।

साहित्य के आचार्य डॉ सतीश नौटियाल ने छात्रों को शिक्षक की अहम भूमिका बताते हुए कहा कि छात्रों का शिक्षक के संरक्षण में ही अच्छे नागरिक व जिम्मेदार व्यक्तित्व का निर्माण हो सकता है। प्रतिदिन शिक्षक छात्र संवाद होना आवश्यक है जिससे ज्ञान का विस्तार होता है और भारत के बेहतर भविष्य का निर्माण होगा।

महाविद्यालय के सभागार में उपस्थित शास्त्री तथा आचार्य के छात्र छात्राओं में सचिन पंत ने श्लोक वाचन, कृष्णा भट्ट ने श्री नरेंद्र सिंह नेगी द्वारा रचित गीत को संस्कृत अनुवाद कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। सौरभ भट्ट तथा शिवम कोठारी ने भाषण के माध्यम से शिक्षकों का सम्मान प्रकट किया। शास्त्री प्रथम वर्ष की छात्रा ईशिता शर्मा ने शिक्षकों को कुम्हार की भांति बताया जो कच्ची मिट्टी से अनेक निर्माण करता है।

शास्त्री प्रथम वर्ष के अन्य छात्र पीयूष भट्ट व शशांक उनियाल ने श्लोकोच्चारण कर शिक्षक दिवस पर प्रस्तुति दी। आदित्य ने पदलालित्य के मधुर श्लोकों से कार्यक्रम को भव्य बनाया। अनेक छात्र-छात्राओं ने इस मौके पर शिक्षकों के प्रति अपनी भावनाएं प्रकट की।

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