धर्म, संस्कृति, व्यावसायिकता और ता रा रा रा ………….
डॉ विक्रम सिंह बर्त्वाल
NARENDRA NAGAR: 50 वां सिद्धपीठ मां श्री कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेला 2026 का आयोजन इस वर्ष भी पूर्व वर्षों की भांति शारदीय नवरात्रि के अवसर पर किया गया। प्रथम नवरात्रि (11 अक्टूबर) से प्रारंभ यह मेला 19 अक्टूबर तक चला। धर्म, संस्कृति और विकास के केंद्रीय भाव और उद्देश्यों पर लक्षित यह मेला उत्तराखंड के प्रसिद्ध मेलों में से एक है। आदिशक्ति मां कुंजापुरी धर्म,संस्कृति और विकास के लिए मूल ऊर्जा पोशक जननी के रूप में लोक विश्वास का अभिन्न हिस्सा हैं।
यहां मैं बात धर्म की इसलिए कर रहा हूं कि महर्षि कणाद ने लौकिक उन्नति और पारलौकिक कल्याण की सिद्धि को धर्म कहा है। जो कि यहां के लोक जीवन में मां कुंजापुरी में रची बसी हुई है। वही संस्कृति किसी समाज में गहराई तक व्याप्त गुणों के समग्र रूप को कहते हैं। जिसे सीधे शब्दों में ‘प्रकृति की मूल स्थिति’ के रूप में जान सकते हैं।
संक्षेप में कहना चाहूंगा कि देवभूमि उत्तराखंड ने धर्म और संस्कृति के क्षेत्र में प्राचीन काल से ही अपनी लौकिक, पारलौकिक तथा मूल प्रकृति को बनाए और बचाए रखने में भारत भूमि और सनातन संस्कृति को बहुमूल्य योगदान दिया है। जो कि हिमालय, ऋषि परंपरा, धाम और यहां के तीर्थों में स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होते हैं।
लेकिन वर्तमान समय में धर्म और संस्कृति में व्यावसायिकता के प्रवेश के कारण कई स्थानों पर नई व्यवस्थाओं के अनुरूप नव-चिंतन की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसी क्रम में हाल ही में संपन्न 50 वें कुंजापुरी मेले की आठवीं रात्रि 18 अक्टूबर 2026 संस्कृतिक कार्यक्रम में घटित एक घटना को प्रासंगित करना चाहूंगा।
कुंजापुरी मेले की आठवीं रात्रि को सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में प्रसिद्ध पंजाबी गायक और पाप संगीतकार दलेर मेहंदी को कुंजापुरी मेला समिति ने निमंत्रित किया था। उस रात्रि को अपनी गायकी और अभिनय में खराब प्रदर्शन के कारण आजकल दलेर चर्चाओं में बने हुए हैं।
कार्यक्रम की रात्रि को उत्तराखंड के वन मंत्री, क्षेत्रीय विधायक और कुंजापुरी मेला समिति के संरक्षक सुबोध उनियाल भी उस समय वहां दर्शक दीर्घा में मौजूद थे जब दलेर मेहंदी अपनी प्रस्तुति दे रहे थे। दलेर की लड़खड़ाती आवाज बैंड और कोरस की प्रधान आवाज दर्शकों को अखर रही थी। लोगों का कहना था कि दलेर केवल लिप्सिंग कर रहे हैं। व्यापक जन दबाव के कारण मंत्री सुबोध उनियाल को मंच पर जाकर हस्तक्षेप करना पड़ा।
उन्होंने दलेर पाजी को कहा कि ‘आप एक बड़ा नाम हैं, आप बड़े कलाकार हैं, लेकिन आप केवल लिप्सिंग कर रहे हैं, आप हम लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं, इतना पैसा देकर हमने आपको अपने लोगों के इंटरटेनमेंट के लिए बुलाया है। आपसे बोला तो जा नहीं रहा है आप गाना क्या गाओगे? ……..
मेहंदी की लड़खडाई आवाज के पीछे मंत्री के ड्रंक्ड वाले बयान से आजकल सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ सी आ गई है फिल्मी हस्तियों से लेकर आम आदमी तथा दलेर के भाई मीका सिंह इस पर खूब प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
लेकिन बात भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार के बड़े नाम दलेर मेहंदी की है, तो ‘मानकीकरण’ की भी आएगी, और इसके साथ व्यावसायिक अनुबंधों की भी, जिनमें सेलिब्रिटी के प्रस्तुतीकरण की सहमति, तिथि, मानदेय, वाहन, आवास स्टेज सुविधाएं तथा शारीरिक और मानसिक स्थिति सही होने पर ही कार्यक्रम प्रस्तुति का अंतिम रूप तय किया जाता है।
दलेर मेहंदी की इवेंट टीम का प्रबंधन जरूर अंतरराष्ट्रीय होगा। लेकिन कई उनके हितैषी लोग उनके स्वास्थ्य ठीक ना होने और सर्जरी की बात कर रहे हैं जो कि सही भी है क्योंकि दलेर मेहंदी ने भारतीय संस्कृति के प्रधान संवाहक के रूप में अपने को प्रतिस्थापित भी किया है और वह हमारी सांस्कृतिक धरोहर भी हैं।
लेकिन प्रश्न है कि प्रबंधन टीम उनके स्वास्थ्य का ध्यान क्यों नहीं रख पाई? और उन्होंने आयोजकों को यह जानकारी क्यों नहीं दी? यह प्रश्न विचारणीय है। जहां तक मेरी जानकारी है कुंजापुरी मेला समिति ने कुल मेला बजट का 33% से ऊपर का इन्वेस्ट कर दलेर मेहंदी को 50वें कुंजापुरी मेले के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सूची में सर्वोच्च स्थान पर रखकर सम्मानित किया था।
जोशीले पंजाबी गीत एवं डांस के लिए प्रसिद्ध दलेर मेहंदी की लड़खड़ाती आवाज ‘अचानक घटी दुर्घटना’ (एक्ट ऑफ़ गॉड)की श्रेणी में नहीं आ सकती क्योंकि लंबे समय के इलाज के बाद फिट होने पर ही उन्होंने प्रस्तुतीकरण की सहमति मेला समिति को दी होगी। आखिर बड़े नाम और बड़ी उम्मीद के पीछे दर्शक एक ग्राहक/ उपभोक्ता के रूप में भी है जिनको अपनी पसंद और नापसंद की अभिव्यक्ति का अधिकार भी है। इसमें किसी भी पक्ष के क्षमा मांगने या ना मांगने से ज्यादा संस्कृति को बचाए रखने के साथ आयोजक और कलाकारों के बीच अनुबंधों की नई सोच विकसित किए जाने के लिए जरूर प्रेरित कर दिया है। बोलो..ता रा रा रा…


