आईटीआई प्रशिक्षण में बड़ा सुधार: 150 घंटे का अनिवार्य ओजेटी/ग्रुप प्रोजेक्ट प्रावधान लागू
देहरादून। भारत सरकार के कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय के तहत प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) ने आईटीआई ट्रेनीज़ के लिए नए नियम जारी किए हैं। अब औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) के छात्रों को क्राफ्ट्समैन ट्रेनिंग स्कीम (सीटीएस) के तहत 150 घंटे की अनिवार्य ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग (ओजेटी) या ग्रुप प्रोजेक्ट करना होगा। यह नियम शैक्षणिक सत्र 2022-23 से लागू है। पुराने ट्रेनिंग सिस्टम में यह देखा गया है कि ट्रेनीज़ ज्यादातर आईटीआई कैंपस में मौजूद पुराने टूल्स और मशीनों से ही ट्रेनिंग लेते हैं। इससे उन्हें मॉडर्न और नई इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी का सीधा अनुभव कम मिल पाता है।
इसी कारण जब उनकी इंडस्ट्री में नौकरी लगती है, तो कई ट्रेनीज़ को फिर से ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग (ओजेटी) की जरूरत पड़ती है। तेजी से बदल रहे इन्डस्ट्रीज़ और टेक्नोलॉजिकल डेवलपमेंट को देखते हुए, इंडस्ट्री-इंटीग्रेटेड ट्रेनिंग को मजबूत बनाना जरूरी हो गया है। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (एनईपी) 2020 के अनुसार, डीजीटी ने सीटीएस की योग्यता में बदलाव किया है। अब सालाना ट्रेनिंग का समय 1600 घंटे से घटाकर 1200 घंटे कर दिया गया है। इसके साथ ही 150 घंटे की अनिवार्य ओजेटी या ग्रुप प्रोजेक्ट जोड़ा गया है, ताकि ट्रेनीज़ को असली इंडस्ट्रियल एनवायरनमेंट का अनुभव मिल सके।
इस अवसर पर भारत सरकार के कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्य मंत्री जयन्त चौधरी ने कहा कि आईटीआई छात्रों के लिए 150 घंटे की अनिवार्य स्ट्रक्चर्ड ऑन द जॉब ट्रेनिंग (ओजटी) या ग्रुप प्रोजेक्ट एक बड़ा सुधार है। इससे वोकेशनल एजुकेशन की क्वालिटी और उपयोगिता बढ़ेगी। तेजी से बदल रही इंडस्ट्रियल दुनिया में सिर्फ क्लासरूम लर्निंग काफी नहीं है। असली वर्कप्लेस एक्सपोजर से छात्रों में प्रैक्टिकल स्किल, कॉन्फिडेंस और प्रोफेशनलिज्म बढ़ता है। यह कदम इंडस्ट्री और ट्रेनिंग संस्थानों के बीच लिंकेज को मजबूत करेगा और युवाओं को सच में जॉब-रेडी और फ्यूचर-रेडी बनाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि सरकार का मकसद सिर्फ सर्टिफिकेट देना नहीं है, बल्कि युवाओं को ऐसी स्किल्स देना है जो असली इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुसार हों। इंडस्ट्री-इंटीग्रेटेड ट्रेनिंग मॉडल के जरिए यह कदम “कुशल भारत -विकसित भारत के विजन को तेजी से आगे बढ़ाएगा। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (एनईपी) 2020 के अनुसार, यह पहल स्किल ट्रेनिंग को ज्यादा प्रैक्टिकल, उपयोगी और इंडस्ट्री-फोकस्ड बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।
ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग (ओजेटी)/ग्रुप प्रोजेक्ट का मुख्य मकसद आईटीआई ट्रेनीज़ की एम्प्लॉयबिलिटी को मजबूत करना है, ताकि वे इंडस्ट्री की असली जरूरतों के अनुसार स्किल्ड बन सकें। इसके जरिए इंडस्ट्री और आईटीआई के बीच सहयोग बढ़ेगा। इससे ट्रेनिंग प्रोग्राम को इंडस्ट्री की मौजूदा जरूरतों के हिसाब से अपडेट रखा जा सकेगा। यह पहल ट्रेनीज़ को वर्कफोर्स में आसानी से शामिल होने में मदद करेगी। इससे उन्हें नौकरी पाने और वर्कप्लेस एनवायरनमेंट में तालमेल बैठाने में आसानी होगी। साथ ही, असली इंडस्ट्रियल एनवायरनमेंट में उनकी स्किल्स का लगातार इवैल्यूएशन होगा, ताकि उनकी दक्षता इंडस्ट्री स्टैंडर्ड के अनुसार विकसित हो सके।
